लोकसभा चुनाव का युद्धघोष हो चुका है. सभी सियासी दल और नेता अपने-अपने वर्चस्व को बचाने में लगे हुए हैं. वर्चस्व की इस लड़ाई में कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद पार्टी नेतृत्व से नाराज चल रहे हैं. माना जा रहा है कि जितिन प्रसाद कांग्रेस का साथ छोड़कर बीजेपी का दामन थाम सकते हैं. अटकलें हैं कि प्रसाद धौरहरा सीट से बीजेपी के उम्मीदवार हो सकते हैं. लेकिन कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व उन्हें मनाने में जुटा हुआ है.

इसी क्रम में सूत्रों के हवाले से खबर है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने जितिन प्रसाद से मुलाकात की है. मुलाकात के बाद जितिन के सामने दो विकल्प हैं. पहला विकल्प है कि जितिन राजनाथ सिंह के खिलाफ लखनऊ से चुनाव लड़ें और हारने की स्थिति में कांग्रेस ने उन्हें राज्यसभा में सीट देने का भरोसा दिया है. नाराज चल रहे जितिन के पास दूसरा विकल्प यह है कि वे धौराहरा लोकसभा सीट से चुनाव लड़ें.

तो क्या मान गए जितिन ?

जितिन प्रसाद धौरहरा से चुनाव नहीं लड़ना चाहते. उनका कहना है कि उनके आसपास की लखीमपुर खीरी और सीतापुर की दोनों सीटों से कांग्रेस मुस्लिम उम्मीदवार लड़ा रही है. प्रसाद को पता चला है कि महागठबंधन की तरफ से धौरहरा में मुस्लिम उम्मीदवार उतारा जाएगा जिसकी वजह से इलाके में हिंदू बनाम मुस्लिम चुनाव हो जाएगा और वह दूसरी बार भी हार जाएंगे. इसीलिए जितिन कांग्रेस नेतृत्व पर दबाव बना रहे थे कि सीतापुर या लखीमपुर खीरी में से किसी भी एक सीट से मुस्लिम उम्मीदवार हटाया जाए.

क्यों कनफ्यूज है कांग्रेस?

वर्तमान स्थिति के मुताबिक जितिन प्रसाद या तो लखनऊ से चुनाव लड़ें और बाद में हारने की स्थिति में राज्यसभा में जाएं, या फिर धौरहरा से चुनाव में उतरें. क्योंकि कांग्रेस अब दोनों में से किसी भी मुस्लिम उम्मीदवारों को बदलकर पूरे राज्य में गलत संदेश नहीं देना चाहती. साथ ही मुश्किल ये भी है कि, सीतापुर की पूर्व सांसद कैसर जहां को कांग्रेस ने पार्टी में शामिल ही टिकट देने की शर्त पर कराया था, तो वहीं दूसरी सीट लखीमपुर खीरी के उम्मीदवार 2009 में पार्टी टिकट पर जीत चुके हैं. सूत्रों की मानें तो कांग्रेस नेतृत्व का ऐसा मानना है कि जितिन प्रसाद लखनऊ से चुनाव लड़ने के लिए तैयार हो जाएंगे.

बता दें कि धरौहरा सीट 2009 में पहली बार वजूद में आई थी और इस सीट पर कांग्रेस के टिकट से जितिन प्रसाद ने जीत दर्ज की थी. लेकिन साल 2014 में बीजेपी के रेखा वर्मा से हार गए थे. जितिन प्रसाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जितेंद्र प्रसाद के बेटे हैं.