मध्य प्रदेश में नेशनल जेल डीजी कॉन्फ्रेंस के समापन कार्यक्रम में मंत्री गोविंद सिंह ने सिमी आतंकियों के एनकाउंटर की घटना का जिक्र करते हुए प्रदेश की जेलों की व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी. उन्होंने सिमी एनकाउंटर के बाद जेलों में लगे बाहरी सामानों पर प्रतिबंध को हटाने की वकालत की है. उन्होंने कहा है कि जेल में बाहरी सामान पर लगे प्रतिबंध को हटाया जाना चाहिए. जेलों में कैदियों की संख्या को लेकर उन्होंने कहा कि पुलिस के टारगेट के चक्कर में जेल में कैदियों की संख्या बढ़ती है. जेलों में क्षमता से ज्यादा कैदी हैं

कॉन्फ्रेंस के दौरान विचारधीन कैदियों को योगा और स्किल के जरिए व्यस्त रखने, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मुलाकात से समय की बचत, जवानों की सुरक्षा के लिए विशेष ट्रेनिंग, कैदियों के पुनर्वास में NGO की महत्वपूर्ण भूमिका, जेलों में जैमर का ठीक से काम नहीं करना जैसी कई विचार और सुझाव निकलकर आए.

इधर, गृहमंत्री बाला बच्चन ने कहा कि कॉन्फ्रेंस में निकले सुझावों को सबसे पहले प्रदेश की जेलों में लागू किया जायेगा. उन्होंने 70 साल के बुजुर्ग कैदियों को रिहा करने को लेकर कानून में संसोधन करने के साथ कैदियों के प्रोडक्ट को ऑनलाइन बेचने की बात कही.

एमपी जेल डीजी संजय चौधरी ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के पहले जेलों की फकीरी पर अपना दर्द बयां किया था. लेकिन समापन कार्यक्रम में उन्होंने सरकार के सामने कई मांगे रखी. उन्होंने जेलों में बंद बुजुर्ग कैदियों को छोड़ने पर सरकार को विचार करने की बात कही. साथ ही उन्होंने बताया कि जेल विभाग के पास संसाधनों की बहुत कमी है. जेलों में मेडिकल की व्यवस्था नहीं है. सागर जेल में एक संस्था के सहयोग से कैदी चंदेरी साड़ियां बना रहे हैं.