दिल की बीमारियों का खतरा सभी उम्र के लोगों में तेजी से देखा जा रहा है। हाल के वर्षों में आपने भी 30 से कम उम्र के लोगों में हार्ट अटैक और इससे जुड़ी मौतों की खबरें जरूर पढ़ी-सुनी होंगी। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, इन तमाम जोखिमों को देखते हुए सभी लोगों को अपनी दिल की सेहत को लेकर बेहद अलर्ट रहने की जरूरत है और दिल से जुड़े किसी भी संकेत को कभी भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

क्या है दिल में सूजन या मायोकार्डिटिस की समस्या?

दिल की बीमारी का नाम सुनते ही ज्यादातर लोगों के दिमाग में हार्ट अटैक, ब्लॉकेज या हाई ब्लड प्रेशर जैसी बातें आती हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि दिल में होने वाली सूजन भी एक बेहद गंभीर समस्या है, जिसके मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इसे नजरअंदाज करना जानलेवा साबित हो सकता है। मेडिकल की भाषा में दिल की इस सूजन को 'मायोकार्डिटिस' कहा जाता है। इसके पीछे वायरल संक्रमण, शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली की गड़बड़ी और अन्य स्थितियां जिम्मेदार हो सकती हैं।

एम्स के अध्ययन और मायोकार्डिटिस के प्रमुख लक्षण

एम्स (AIIMS) के एक अध्ययन में सामने आया है कि इस समस्या से पीड़ित मरीजों की औसत उम्र 38 साल थी। इनमें से 68.4 प्रतिशत मरीजों को धड़कनों के तेज या अनियमित होने की और 52.63 प्रतिशत को सांस फूलने की शिकायत थी, जबकि एमआरआई जांच में 63.15 प्रतिशत मरीजों में मायोकार्डिटिस के स्पष्ट संकेत मिले। मायोकार्डिटिस के लक्षण सामान्य लग सकते हैं, जैसे:

  • छाती में दर्द या भारीपन

  • सांस लेने में कठिनाई

  • अत्यधिक थकान और कमजोरी

दिल की सूजन से जुड़े बड़े खतरे और हार्ट फेलियर का जोखिम

दिल की मांसपेशियों में सूजन को नजरअंदाज करना भारी नुकसान पहुंचा सकता है, क्योंकि बीमारी बढ़ने पर हृदय के रक्त पंप करने का तरीका प्रभावित होने लगता है। कार्डियक सारकॉइडोसिस जैसी गंभीर स्थितियों में सूजन के कारण दिल की विद्युत गतिविधि बिगड़ जाती है, जिससे धड़कनें बहुत तेज या अनियमित हो जाती हैं। गंभीर मामलों में यह स्थिति हार्ट फेलियर का कारण बन सकती है, जिसमें हृदय शरीर की जरूरत के अनुसार पर्याप्त खून पंप नहीं कर पाता है।

समय पर पहचान और बचाव के लिए जरूरी जांच

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि केवल लक्षणों के आधार पर इस बीमारी की सटीक पहचान करना मुश्किल होता है, इसलिए हृदय की विस्तृत जांच बेहद महत्वपूर्ण है। यदि लगातार धड़कनें अनियमित रहती हैं या बिना किसी स्पष्ट कारण के सांस फूलती है, तो तुरंत डॉक्टर से मिलकर कारण का पता लगाना चाहिए। इस समस्या का सही पता लगाने के लिए 'कार्डियक एमआरआई' जैसे टेस्ट की सलाह दी जाती है, जिससे हृदय की मांसपेशियों में होने वाले सूक्ष्म बदलावों को भी आसानी से देखा जा सकता है।