भोपाल. गुजरा साल भले ही केंद्र के लिए आर्थिक मंदी के दौर से उबरने से जुझते हुए निकल गया हो लेकिन प्रदेश में औद्योगिक निवेश की सरकारी कोशिशें असरदार साबित हुई हैं. सरकारी आंकड़ों में दावा किया गया है कि प्रदेश में कमलनाथ सरकार के उद्योगों को बढ़ावा देने की कोशिशों के कारण 32 हजार करोड़ से ज्यादा के निवेश प्रस्ताव (Investment Proposal) सरकार को मिले हैं. सिर्फ इतना ही नहीं, प्रदेश में एक साल पूरे करने वाली कमलनाथ सरकार में उद्योग में निवेश के लिए 250 से ज्यादा उद्योगपतियों ने हाथ आगे बढ़ाया है. सरकार ने एक साल में उद्योग लगाने वाले उद्योगपतियों को 773.29 एकड़ जमीन भी आबंटित कर दी है.

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

>> साल 2019 में 773.29 एकड़ जमीन उद्योगों के लिए दी गई, जो साल 2018 के मुकाबले 67 फीसदी ज्यादा है


>> उद्योगों के लिए 7365 करोड़ का निवेश होगा, जो कि साल 2018 के मुकाबले 52 फीसदी ज्यादा है.

औद्योगिक बिजली की खपत भी बढ़ी

सिर्फ उद्योगों में निवेश ही नहीं बल्कि उद्योगों में बिजली की खपत में भी जबरदस्त इजाफा हुआ है. जारी आंकड़ों में एक साल में औद्योगिक इकाईयों में 928 करोड़ 26 लाख यूनिट बिजली की रिकॉर्ड खपत हुई है, जो साल 2018 के मुकाबले 18 फीसदी ज्यादा रही है. जो बताती है कि राष्ट्रीय स्तर पर औद्योगिक इकाईयों में बिजली की खपत घटने के उलट प्रदेश में बिजली की खपत तेजी से बढ़ रही है, जिसे कांग्रेस शुभ संकेत मान रही है तो बीजेपी इसे आंकड़ों का खेल बता रही है.

सरकार के दावे, बीजेपी के आरोप

नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कहा है कि सरकार बताए कि प्रदेश में कितने बेरोज़गारों को अब तक रोज़गार मिला है. बहरहाल सरकार के सूत्रों के मुताबिक, प्रदेश में निवेश को लेकर मिले प्रस्तावों में फूड प्रोसेसिंग से लेकर फार्मास्यूटिकल तक में नये उद्योग लगने प्रस्तावित हैं. सरकार की पहल ने असर दिखाया तो राज्य के एक लाख से ज्यादा बेरोजगारों को रोजगार के अवसर मिल सकेंगे. सरकार का एक साल पूरा होने पर सामने आये आंकड़ें बता रहे हैं कि प्रदेश में उद्योग लगाने के लिए उद्योगपतियों का भरोसा बढ़ रहा है और केंद्र की चिंताओं के उलट प्रदेश के लिए शुभ संकेत निकलकर सामने आ रहे हैं.

मंत्री सुखदेव पांसे ने कहा है कि कमलनाथ सरकार के एक साल के कार्यकाल से उद्योगों का भरोसा बढ़ा है और राज्य में बेरोजगारी की दर में बड़ी कमी आई है. उन्होंने इसे सरकार की नीतियों का नतीजा बताया है.