नई दिल्ली | सबसे सुरक्षित माने जाने वाले निवेश के रूप में सोने ने पिछले 16 साल में खूब उड़ान भरी। इस अवधि में सोना 7000 से  56000 प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया। सात अगस्त 2020 को 56 हजार रुपए प्रति दस ग्राम पर पहुंचने के बाद सोना लगातार फिसल रहा है। अब तक 9000 रुपए तक की गिरावट इसमें आ गई है। दूसरी ओर 2006 में सोना 9 हजार रुपए प्रति दस ग्राम के आसपास था, जो 2016 में 31 हजार रुपए प्रति दस ग्राम तक पहुंच गया था। यानी नौ साल में तीन गुना से ज्यादा बढ़ोतरी। इसके बाद 2017 में मामूली बढ़ोतरी के बाद सोने की कीमतें 2018 में गिरकर 29000 पर आईं। सोने की चमक एक बार फिर 2019 में बढ़ी और 10000 रुपये प्रति 10 ग्राम की उछाल के साथ 39000 पर पहुंच गई। सोने की उड़ान यहीं नहीं थमी। सोने के रेट में तेजी का सिलसिला 2020 में भी जारी रहा और यह 17000 रुपये की जबरदस्त छलांग के साथ ऑलटाइम हाई 56254 पर पहुंच गया।  क्योंकि ब्याज दरें इतनी कम हो गईं कि निवेश के लिहाज से सोना सबसे बेहतर साबित हुआ। बता दें जब-जब ब्याज दरें घटती हैं, तब सोने में निवेश बढ़ता है।

सोना ही निवेश का बेहतर विकल्प
शेयर मार्केट और सोने के बीच संबंध कुछ ऐसा है कि जब-जब शेयर मार्केट में गिरावट दर्ज होती है या मंदी की आहट होती है, पीली धातु की रफ्तार बढ़ जाती है। ग्लोबल कंसल्टिंग फर्म डेलोइट ने अप्रैल के आउटलुक में कहा था कि ब्याज दरों में गिरावट होगी। ऐसा ही हुआ। आज देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में बैंक की ब्याज दरें एक दशक में सबसे कम हैं। आज की तारीख में भारत की बात करें तो रेपो रेट सिर्फ 4 प्रतिशत के आसपास है। ब्याज दरें कम हैं, ऐसे में लोगों के लिए सोना ही निवेश का बेहतर विकल्प बना हुआ है।

2020 में 25 फीसदी की तेजी आई थी
कोरोना वायरस के प्रभाव को कम करने के लिए दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों और सरकारों द्वारा राजकोषीय उपायों ने पिछले साल सोने की कीमतों में 25 फीसदी से अधिक की वृद्धि की थी, जबकि चांदी लगभग 50 फीसदी बढ़ गई थी। सोने को महंगाई और मुद्रा में आई गिरावट से सुरक्षा देने वाला माना जाता है, लेकिन एनालिस्ट कह रहे हैं कि सोने की कीमतों में गिरावट का कारण सिर्फ स्टॉक मार्केट में तेजी नहीं है। बल्कि कई अन्य कारण भी हैं।


16 साल में सोने की छलांग

साल कीमत (रुपये/10 ग्राम)
2005 7000
2006 9000
2007 10800
2008 12500
2009 14500
2010 18000
2011 25000
2012 32000
2013 33000
2014 30000
2015 28700
2016 31000
2017 31400
2018 29000
2019 39000
2020 56000
2021 47237

पिछले 10 साल में सेंसेक्स और निफ्टी ने 9.05% और 8.5% के सालाना औसत से वृद्धि दर्ज की है। 2010 और 2015 के बीच 2012 की मंदी के बाद भी वृद्धि देखी गई। फरवरी 2016 से फरवरी 2020 तक सेंसेक्स की वृद्धि देखें तो वह 17,500 से बढ़कर 40,000 अंकों तक पहुंच गया। साफ है कि रिस्क होने के बाद भी इक्विटी में निवेश का ट्रेंड बढ़ा है।