• कोरोना संकटकाल में 84 घंटे की वीडियो कांफ्रेंसिंग का कीर्तिमान रच डाला
  • सोशल मीडिया के सभी टूल्स पर छाये रहे मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री

 

भोपाल। देश में जब कोरोना जैसी विभीषिका ने दस्तक दी तो न केवल स्वास्थ्य जगत बल्कि शासन और प्रशासन के मजबूत खिलाड़ी भी सकते में आ गए थे, ऐसे में बीमारी से जूझना तो चुनोती था ही,जन सामान्य में जागरूकता लाना भी कम दुष्कर नही था।मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री का पद संभालते ही शिवराज सिंह चौहान को इस महामारी का सामना करना था, वह भी भीड़ के बीच जाए बगैर। चारों ओर से संक्रमित मरीजों के मिलने की सूचनाएं और उनको बचाना दोनों मोर्चों को संभाला श्री चौहान ने। मप्र के मुख्यमंत्री ने ऐसे हालात में बदली हुई प्रशासनिक शैली से आधुनिक तकनीक और सोशल मीडिया का जी भर कर सदुपयोग किया । इस अजीब तरह की  महामारी को लेकर अपनी बात जनसामान्य तक पहुंचा पाने में वे सफल भी रहे। उस समय मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने ना केवल प्रशासनिक दक्षता का परिचय दिया बल्कि अपनी सक्रियता से सोशल मीडिया के सभी प्लेटफार्म पर अपनी उपस्थिति कई कीर्तिमान भी बना दिये। देश के किसी भी राज्य के अन्य मुख्यमंत्री ने  30 दिन के संक्रमण काल में 45 घंटे वीडियो कांफ्रेंसिंग की । 28 दिन में ट्विटर पर खुद के 58 वीडियो, फेसबुक पर 108 वीडियो और 28 दिनों में 6 मिलियन रिच उनकी फेसबुक पर आई  हैं। 28 मिलियन जिसके इंप्रेशन फ़ेसबुक हैंडल पर मिले हो,ट्विटर पर 7 मिलियन इंप्रेशन के साथ चला हो ।एक बड़े संवाद सेतु के साथ कोरोना के युद्ध मे महायोद्धा बन कर शिवराज सिंह डिजिटल मैदान में डटे रहे। सोशल मीडिया के जानकारों की माने तो मध्यप्रदेश के  शिवराज सिंह चौहान ने लगभग 92 घण्टे की वीडियो कांफ्रेंस की एक्टिविटी अपने अधिकारियों, कोरोना वारीरयर्स के साथ की।
जिन विकट परिस्थिति में सत्ता की बागडोर चौहान ने संभाली थी तो ऐसे में राजनीतिक और प्रशासनिक पकड़ के साथ उन्हें जनता में इस बीमारी का भ्रम दूर करना और इस महामारी से बचाने का संदेश देना भी एक बड़ा उद्देश्य था, इस मिशन में वे  काफी हद तक सफल रहे ।जिन परिस्थितियों में प्रिंट मीडिया का प्रकाशन लगभग डगमगा गया था उसमें भी डिजिटल मीडिया जिसमें फेसबुक लाइव और वीडियो कांफ्रेंसिंग जैसी आधुनिक और जनता से दूर होकर भी जुड़े रहने की सेवाओ का भरपूर उपयोग शिवराज सिंह चौहान द्वारा किया गया। यूं तो देश के सभी राज्यों में मुख्यमंत्रियों ने अपने अपने स्तर पर तकनीकी  सूचनाओं के आदान-प्रदान का उपयोग किया,  लेकिन जिस शिद्दत से और सार्थक तरीके से  जन सामान्य में शिवराज सिंह चौहान ने अपनी पैठ बनाई है वह निश्चित रूप से तारीफे काबिल है ।


सरकार का आधुनिक और सफल सोशल डिस्टेंसिंग

23 मार्च को जब श्री शिवराज सिंह चौहान ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री का पदभार संभाला, तब तक वैश्विक महामारी कोरोना ने प्रदेश में दस्तक दे दी थी। जबलपुर में प्रदेश का पहला पॉजिटिव प्रकरण सामने आया चुका था और कोरोना संक्रमण की रोकथाम में पहला कदम उठाते हुए 24 मार्च की रात आठ बजे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने पूरे देश में लॉकडाउन की घोषणा कर दी। केंद्र सरकार के इस फैसले के बाद मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के सामने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए मुश्किल वक्त में प्रदेश में गुड गर्वनेंस स्थापित करना बड़ी चुनौती थी। लेकिन लंबे शासकीय अनुभव वाले मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने इस चुनौती को स्वीकारा और नेशनल इनफॉर्मेटिक सेंटर की व्यवस्था को अपना सहारा बनाया।

कोरोना संकट के समय में NIC की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की व्यवस्था को मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने, अपने अधिकारियों और प्रदेश की जनता के बीच संदेश सेतु बनाया। संचार के आधुनिकतम तकनीक के रूप में विकसित हो चुके वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग ने शासन और आम जनता के बीच में बेहतर और निरंतर संवाद स्थापित किया।

23 मार्च के बाद से मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर प्रदेश के हर वर्ग के लोगों से जुड़ रहे हैं। मुश्किल समय में अबतक 85 से अधिक वीसी के माध्यम से मुख्यमंत्री अपने अधिकारियों के संपर्क में तो हैं हीं, इसके अलावा अब तक दर्जनों बार इसी तकनीक का इस्तेमाल कर उन्होंने डॉक्टरों, पत्रकारों, पुलिस, उद्योगपतियों, धर्मगुरूओं, कोरोना से जंग जीतकर लौट रहे मरीजों समेत सभी प्रकार के लोगों से बात की और सक्रियता से शासन का संचालन कर रहे हैं।

संकट के इसी दौर में मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने NIC की e-payment पोर्टल के माध्यम से बाहर राज्यों में फंसे मजदूरों, मिड डे मिल के रसोइयों, खाद्यान सुरक्षा भत्ता, विद्यार्थियों को छात्रवृति की राशि समेत कई योजनाओं के हितग्राहियों को भुगतान किया। NIC के सहयोग से मुख्यमंत्री द्वारा जीवन अमृत योजना, जीवन शक्ति योजना का भी शुभारंभ किया गया।

कोरोना संकट में संवाद सेतु के रूप में कार्य कर रहे NIC का इस्तेमाल सिर्फ मुख्यमंत्री द्वारा ही नहीं किया गया। बल्कि प्रदेश के मुख्य सचिव ने 30 वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए 43 घंटों तक अधिकारियों के साथ ऑनलाइन मीटिंग की। वहीं स्वास्थ्य, खाद्य, सहकारिता, चिकित्सा शिक्षा, वन, वित्त विभागों द्वारा भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और वीडियो कॉलिंग तकनीक का इस्तेमाल कर कोविड-19 से बचाव के लिए किए जा रहे कार्यों की समीक्षा की गई।

कोरोना महामारी के प्रकोप का सामना करने के लिए मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान अपने कुशल प्रशासनिक अनुभव और सूझबूझ के साथ सूचना एवं संचार तकनीक का पूरा इस्तेमाल कर रहे हैं। मुख्यमंत्री के इस प्रयास को एक सफल मोड़ तक ले जाने के लिए NIC की टीम भी #CoronaWarriors बनकर दिन रात मेहनत कर रही है। इन सभी की कोशिशों का परिणाम है कि त्वरित संवाद की वजह से सही समय पर सही कार्रवाई की जा रही है और प्रदेश पूरी मजबूती के साथ कोरोना से जंग लड़ रहा है।
डॉ. नवीन आनन्द जोशी