भोपाल में आज से एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय की राष्ट्रीय खेलकूद प्रतियोगिता टी.टी. नगर स्टेडियम में शुरू हुई। शुभारंभ समारोह में एकलव्य विद्यालय के छात्रों ने प्रदेश की आदिवासी संस्कृति पर केन्द्रित नृत्यों की आकर्षक प्रस्तुतियाँ दीं। इसके साथ ही, विभिन्न राज्य के कलाकारों ने अपने राज्य की लोक संस्कृति पर आधारित प्रस्तुतियाँ भी दीं।

मध्यप्रदेश की गोंड जनजाति के साथ ही भील, बैगा, भारिया, कोरकू और घसिया जनजाति कलारूपों के पारम्परिक नृत्य और संगीत को हस्त-मुद्राओं, शारीरिक कौशल के साथ खेलों की पृष्ठभूमि से जोड़ते हुए प्रदर्शित किया गया। प्रदेश के सीमांचल राज्यों, पहाड़ी प्रदेशों आसाम, उत्तराखण्ड आदि के प्राकृतिक संगीत को भी शुभारंभ समारोह में कलाकारों ने आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया। प्रस्तुति में गोंड जनजाति के मड़ई मेलों के प्रतीक झण्डे को भी केन्द्र में रखा गया।

प्रस्तुति का आरंभ प्रदेश की गोंड जनजाति पारम्परिक गुदुमबाजा और छिन्दवाड़ा के गेड़ी नृत्य से हुआ। इसमें कलाकारों ने गुदुम की ध्वनि और गेड़ी पर नृत्य करते हुए प्रवेश किया। इनके बीच कलाकारों ने शेर के भेष में नृत्य प्रस्तुत किया। सीधी की घसिया जनजाति का घसियाबाजा, हरदा की कोरकू जनजाति का गदली, बघेलखण्ड अंचल का बरेदी, महाराष्ट्र का सौंगी मुखौटा, बैतूल की गोंड जनजाति का ठाट्या, छिन्दवाड़ा का गोंड जनजाति गेड़ी, उत्तराखण्ड का हिलजात्रा, झाबुआ का भील जनजातीय भगोरिया, उत्तर पूर्वी राज्य आसाम का बिहू, डिण्डोरी का गोंड जनजाति सैला, बैगा जनजाति का करमा, निमाड़ अंचल का काठी, पश्चिम बंगाल का नृत्य और मार्शल आर्ट पुरलिया छाऊ, सीधी जिले की कौल जनजाति का नगड़िया और छिन्दवाड़ा जिले के पातालकोट क्षेत्र में निवास करने वाले भारिया जनजाति के भड़म नृत्य की प्रस्तुति हुई। प्रस्तुति के बीच पारम्परिक नृत्य रूपों में उपयोग होने वाले तीर-कमान, मुखौटों का कलाकारों द्वारा उपयोग किया गया। लोक कलाकारों ने तीर-कमान को एकलव्य से जोड़ते हुए गुरु-शिष्य परम्परा को आकर्षक ढंग से अभिव्यक्त किया। नृत्य प्रस्तुति की कल्पना प्रख्यात रंगकर्मी पूर्व निदेशक, मध्यप्रदेश नाट्य विद्यालय श्री संजय उपाध्याय की थी।