भोपाल । अनुबंधों का उल्लंधन करने की शिकायत मिलने पर राजधानी में स्मार्ट पार्किंग चलाने वाली कंपनी माइंडटेक का ठेका निरस्त किया जाएगा। इसके लिए नगर निगम प्रशासन द्वारा विधि विशेषज्ञों का मत मांगा है। अनुबंध का किस तरह कंपनी ने उल्लंघन किया है, इसको आधार बनाकर कार्रवाई की जाएगी। पिछली एमआईसी की बैठक में एमआईसी मेंबरों ने स्मार्ट पार्किंग की गड़बड़ियों को लेकर जमकर हंगामा किया था, इसके बाद महापौर आलोक शर्मा ने निगम अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि कमेटी बनाकर जांच की जाए। उन्होंने कहा था कि यदि कंपनी अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन कर रही है तो ठेका निरस्त कर ब्लैक लिस्टेड करने की कार्रवाई करें। बाकी के बचे हुए पार्किंग स्थलों का ठेका नए सिरे से करें। बता दें कि माइंडटेक कंपनी को फायदा पहुंचाने और अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन को लेकर शुरू से ही निगम प्रशासन सवालों के घेरे में रहा है। 
    आगामी एमआईसी की बैठक में स्मार्ट पार्किंग पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है। माइंडटेक कंपनी द्वारा सदर मंजिल पार्किंग में सरकारी कार के खड़े होने पर निगम आयुक्त को 13 हजार 500 रुपए जमा करने के लिए लीगल नोटिस जारी किया गया था। यही नहीं एमपी नगर, न्यू मार्केट सहित अन्य स्थानों पर पार्किंग के बाहर गाड़ियां खड़ी होने पर व्यापारियों व निजी वाहन मालिकों को भी लीगल नोटिस जारी करने का मामला सामने आया था। कंपनी ने सिविल वर्क के एवज में निगम पर ही सवा करोड़ रुपए की रिकवरी निकाल दी थी। निगम ने खर्च के मूल्यांकन के लिए कमेटी भी बनाई थी पर अब तक रिपोर्ट तैयार नहीं हो सकी। इसमें निगम के अधिकारियों की लापरवाही यह रही कि कंपनी को सिविल वर्क तो सौंपा गया लेकिन इसके रेट तय नहीं किए गए थे। जिससे कंपनी ने मनमाना बिल थमा दिया। एमआईसी सदस्यों का आरोप है कि सालभर में कंपनी से तीन करोड़ रुपए वसूला जाना है, लेकिन कंपनी ने निगम को अब तक महज 40 लाख रुपए ही दिए हैं। इससे राजस्व का नुकसान हो रहा है। अनुबंध की शर्तों में छह महीने में 58 स्थानों पर स्मार्ट पार्किंग शुरू होना था, लेकिन दो साल में आधी ही चालू हो पाई।