प्रदेश के ग्रामीण अंचल में आमजन को साफ पानी की जद्दोजहद से निजात दिलाने में मुख्यमंत्री नल-जल योजना बहुत कारगर साबित हुई है। ऐसे में योजना को सफलतापूर्वक क्रियान्वित करने में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग और स्थानीय ग्राम पंचायतों का समन्वय सराहनीय रहा है।

मन्दसौर जिले में सीतामऊ विकासखण्ड के ग्राम झलारा में गर्मी की  तपन में पेयजल के मुख्य स्त्रोत सूख गए थे। ग्राम पंचायत ने जब निर्मल नीर कूप का निर्माण करवाया, तब पर्याप्त पानी तो मिला, परन्तु पेयजल टंकी तक पाइप लाइन न होने से रहवासी पानी का उपयोग नहीं कर पा रहे थे। पीएचई विभाग ने गाँव में 19.75 लाख से 1650 मीटर पाइप लाइन डलवाई। अब ग्रामवासियों को घर-घर नल कनेक्शन के जरिए पर्याप्त पानी उपलब्ध हो रहा है।

 रीवा जिले में दूरस्थ तराई अंचल के जवा विकासखण्ड के ग्राम पहिलवार की तीन बस्ती के लोग लम्बे समय से पेयजल संकट से गुजर रहे थे। पिछले वर्ष इस इलाके में अल्प वर्षा के कारण भूमिगत जल-स्तर काफी नीचे चला गया था। इससे हैण्ड पम्प सूखने लगे थे। पीएचई विभाग ने इन बस्तियों में सिंगल फेस मोटर पंप स्थापित कर लोगों को पेयजल की सुनिश्चित व्यवस्था करवा दी है। इसी विकासखण्ड की ग्राम पंचायत हरदौली, बोसड, धतेनी, लोहगढ़ और चौखण्‍डी मे भी सिंगल फेस मोटर स्थापित करवाकर पानी की समस्या से लोगों को मुक्त करा दिया गया है।

सिंगरौली जिले के बैढ़न विकासखण्ड के ग्राम खुटार की कहानी कुछ  अलग है। इस कोयला उत्पादक इलाके में पानी मिल जाना सौभाग्य की बात मानी जाती है। तीन हजार की आबादी वाले इस इलाके में कहने को तो 121 हैण्ड-पम्प अलग-अलग मोहल्ले में लगे थे, परन्तु गर्मी बढ़ने के साथ ही जल-स्तर बहुत अधिक नीचे जाने के कारण कई हैण्ड-पम्पों में पानी बहुत कम हो गया था। पीएचई विभाग द्वारा यहाँ मुख्यमंत्री नल-जल योजना शुरू करवाकर टंकी के माध्यम से रहवासियों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध करवाया जा रहा है।