नई दिल्ली
यम! ब्रांड्स के मालिकाना हक वाली KFC इंडिया 61 रेस्ट्रॉन्ट्स को RJ कॉर्प की देवयानी इंटरनेशनल लिमिटेड (DIL) को बेच रही है। हालांकि, इस डील की रकम का पता नहीं चला है। एग्रीमेंट के तहत पहले ही भारत में यम! की सबसे बड़ी फ्रेंचाइजी पार्टनर DIL कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में 61 अतिरिक्त रेस्ट्रॉन्ट्स एक्वायर करेगी।

KFC इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर समीर मेनन ने इकनॉमिक टाइम्स को बताया, 'हम प्रत्येक वर्ष की एक प्रक्रिया और बिजनस ग्रोथ के अनुसार अपने बिजनस का इवैल्यूएशन करते हैं। हमारी स्ट्रैटेजी बड़ी संख्या में आउटलेट का मालिक बनने या ऑपरेट करने की नहीं है। इसके बजाय हम ब्रैंड के लिए ग्रोथ बढ़ाना चाहते हैं।'

भारत में यम के एक अन्य ब्रैंड पिज्जा हट की पूरी फ्रेंचाइजी DIL के पास है। DIL देश में यम की सबसे पुरानी फ्रेंचाइजी पार्टनर है। इस डील के बाद यह 500 से अधिक KFC और पिज्जा हट रेस्ट्रॉन्ट्स ऑपरेट करेगी। पिछले वर्ष KFC ने केरल और गोवा में 13 रेस्ट्रॉन्ट्स DIL को बेचे थे। DIL के चीफ एग्जिक्यूटिव विराग जोशी ने बताया, 'हमारे पोर्टफोलियो में KFC तेजी से बढ़ने वाले ब्रैंड्स में शामिल है। यम के साथ हमारी पार्टनरशिप ब्रांड की मौजूदगी बढ़ाने और वर्ल्ड क्लास बिजनस तैयार करने से जुड़ी है।'

RJ कॉर्प की फूड और रिटेलिंग यूनिट DIL भारत में पिज्जा हट, KFC, ब्रिटेन की चेन कोस्टा कॉफी और डेयरी ब्रैंड क्रीम बेल को ऑपरेट करती है। RJ कॉर्प की वरुण बेवरेजेज दक्षिण एशिया में पेप्सिको की सबसे बड़ी बॉटलिंग पार्टनर है। इस डील के साथ देश के 100 से अधिक शहरों में KFC इंडिया के लगभग 400 आउटलेट में से 10 पर्सेंट से कम कंपनी के मालिकाना हक वाले होंगे। दुनिया भर में KFC के बिजनस में से 98 पर्सेंट से अधिक अब फ्रेंचाइजी मालिक ऑपरेट कर रहे हैं। KFC की मौजूदगी करीब 140 देशों में है।

भारत में यम! की एक अन्य फ्रेंचाइजी पार्टनर सैफायर फूड्स की शुरुआत 2016 में समारा कैपिटल की अगुवाई वाले फंड्स ने की थी। इसके बाद सैफायर फूड्स ने यम! ब्रांड्स के फ्रेंचाइजी बिजनस का एक हिस्सा 750 करोड़ रुपये में खरीदा था। नैशनल रेस्ट्रॉन्ट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया का अनुमान है कि 2018-19 में फूड सर्विस इंडस्ट्री 4.2 लाख करोड़ रुपये की थी। इसके 2022-23 तक 9 पर्सेंट की दर से बढ़ने की उम्मीद है। मेनन ने बताया, 'मॉनसून और इन्फ्लेशन जैसे अस्थायी झटके लग सकते हैं, लेकिन मिड से लॉन्ग टर्म में हम बिजनस को लेकर पॉजिटिव हैं।' नोटबंदी और जीएसटी की वजह से देश में क्विक सर्विस रेस्ट्रॉन्ट्स बिजनस को झटका लगा था, जिससे वे पिछले कुछ समय से उबरी हैं। हालांकि, अभी भी उनकी ग्रोथ पिछले पीक लेवल से कम है।