भोपाल। प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग की अध्यक्ष श्रीमती शोभा ओझा ने आज पत्रकार वार्ता में प्रदेश कांग्रेस सरकार की छ: माह की उपलब्धियों का रिपोर्ट कार्ड प्रस्तुत करते हुए कहा कि, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही 2 घंटे के भीतर किसानों की कर्ज माफी के महत्वपूर्ण निर्णय पर हस्ताक्षर करके कमलनाथ ने देश में एक इतिहास रच दिया है।
मध्यप्रदेश में कुल 48.89 लाख किसानों में से लगभग 20 लाख किसानों की कर्ज माफी मई तक हो चुकी है। जय किसान समृद्धि योजना के तहत प्रदेश के किसानों को गेहूं का समर्थन मूल्य 2000 रुपये प्रति क्विंटल मिल रहा है जो कि केंद्र द्वारा घोषित 1840 रुपए से प्रति क्विंटल से 160 रुपये अधिक है। इस योजना से 18 लाख किसान लाभान्वित होंगे और इसके अंतर्गत 1550 करोड़ रुपये की राशि लाभान्वित किसानों के खातों में जमा कराई जाएगी।
इंदिरा गृह ज्योति योजना के तहत 100 यूनिट की खपत पर 100 रुपये बिजली का बिल देना होगा।  इस योजना में सरकार लगभग 2116 करोड़ रुपए की वार्षिक सब्सिडी प्रदान करने वाली है।  जिससे 62 लाख हितग्राही लाभान्वित हो रहे हैं।
इंदिरा किसान ज्योति योजना के तहत अप्रैल 2019 से वचन.पत्र के मुताबिक प्रदेश में 10 हॉर्स पावर तक के कृषि पंपों का बिल आधा किया गया है।  जिससे 18 लाख हितग्राहियों को फायदा पहुंचा है। इस वर्ष जनवरी से मई माह के बीच कुल 2921 करोड़ यूनिट बिजली का प्रदाय हुआ है जो कि पिछले साल की तुलना में लगभग 378 करोड़ यूनिट यानी लगभग 13 प्रतिशत अधिक है।
मुख्यमंत्री कन्या विवाह -निकाह योजना की अनुदान राशि भी 51000 रुपये कर दी गई है।  जो कि पिछली सरकार में मात्र 28000 रुपये हुआ करती थी। 
दिव्यांग महिला और सामान्य पुरुष के बीच विवाह को बढ़ावा देने हेतु प्रोत्साहन राशि बढ़ाकर दो लाख रुपये कर दी गई है। राज्य सरकार ने जहां पिछड़े वर्ग के आरक्षण को बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने का निर्णय लिया है।  वहीं आर्थिक रूप से दुर्बल सामान्य वर्ग के नागरिकों के लिए भी 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान लागू किया है। 
युवा स्वाभिमान योजना के माध्यम से युवाओं को 100 दिन की रोजगार गारंटी जिससे हर महीने युवाओं को 4000 रुपये के स्टाइपेंड के साथ कौशल विकास का प्रशिक्षण मिलना प्रारंभ हो गया है इससे प्रदेश के 6 लाख 50 हजार युवा लाभान्वित हो रहे हैं। 
लोक निर्माण विभाग द्वारा केवल 6 माह में ही अब तक 13 किलोमीटर की सड़कों के उन्नयन-निर्माण के लिए 602 करोड रुपए खर्च किए गए हैं।द्य  27 पुलों का निर्माण भी 186 करोड रुपए की लागत से किया गया है।  और 1550 किलोमीटर सड़कों का नवीनीकरण कर दिया गया है। 
प्रदेश में गोवंश के संरक्षण तथा संवर्धन के लिए अब तक लगभग 1000 गौशालाओं को स्थापित करने का निर्णय ले लिया गया है।  जिससे ग्रामीणों तथा मजदूरों को भी रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। 
पुलिसकर्मियों को सप्ताह में 1 दिन अवकाश का प्रावधान भी किया गया है। पुलिस बल में 50 हजार पुलिसकर्मियों की भर्ती करने के साथ ही उनका आवास भत्ता बढ़ाकर 5000 रुपये करने के प्रयास शुरू हो चुके हैं। 
शासकीय सेवकों को जनवरी 2019 से देय महंगाई भत्ते की स्वीकृति दी गई है। कमलनाथ सरकार ने उद्योग नीति में संशोधन करए मध्यप्रदेश में लगने वाले उद्योगों में स्थानीय युवाओं को 70 प्रतिशत रोजगार देना अनिवार्य कर दिया है। 
इंडिया सीमेंट्स, हिंदुस्तान इलेक्ट्रो ग्रेफाइट्स ;एचईजी, वंडर सीमेंट्स,प्रॉक्टर एंड गैंबल, श्रीराम पिस्टल आदि वृहद् उद्योगों के निवेश प्रोत्साहन की मंत्री परिषद समिति से स्वीकृति प्रदान की गई है।  इसमें 6000 करोड रुपए का निवेश होगा तथा 7600 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे। 
शासकीय विद्यालयों में 52 हजार रिक्त पदों के लिए शासकीय शिक्षकों की व्यवस्था की जा रही है। उच्च माध्यमिक एवं माध्यमिक शिक्षक वर्ग के लिए लगभग 22 हजार पदों के लिए पात्रता परीक्षा का आयोजन भी फरवरी 2019 में किया गयाए जिसमें लगभग 700000 अभ्यर्थियों द्वारा भाग लिया गया। 
कमलनाथ सरकार ने मात्र 6 माह में ही लगभगएए 56 लाख विद्यार्थियों को 475 करोड़ रुपए की छात्रवृत्ति का वितरण सुनिश्चित किया। प्रदेश की 22812 ग्राम पंचायतों में से 22583 का विकास प्लान अब तक तैयार हो चुका है और इसी के अनुरूप आगे की रूपरेखा पर कार्य जारी है। 
तेंदूपत्ता बोरियों की संग्रहण दर 2000 रुपये से बढ़ाकर 2500 रुपये प्रति बोरा कर दी गई है। वित्त विकास निगम द्वारा आदिवासी हितग्राहियों को प्रदाय लगभग 45 करोड़ की लोन राशि माफ कर दी गई है। 
ग्रामीण क्षेत्रों में 3159 नए हैंडपंप लगाकर पेयजल की व्यवस्था की गई है। नदी पुनर्जीवन कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदेश के 36 जिलों में 40 नदियों का चयन कर 21 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सघन रूप से जल संरक्षण एवं संवर्धन के कार्य प्रारंभ कर दिए गए हैं। 
मध्यप्रदेश में मेट्रो ट्रेन का प्रोजेक्ट बहुत जल्दी वास्तविकता के धरातल पर उतरेगा और पूरी उम्मीद है कि अगले 4 सालों में इंदौर और भोपाल में मेट्रो ट्रेन दौड़ती हुई दिखाई देंगी।