उत्तर प्रदेश की सबसे हाईप्रोफाइल लोकसभा सीट गोरखपुर से कांग्रेस ने अधिवक्ता मधुसूदन त्रिपाठी को टिकट दिया है. मधुसूदन तिवारी कई बार गोरखपुर की बार एसोसिएशन के चेयरमैन रह चुके हैं. वहीं, गोरखपुर लोकसभा सीट सीएम योगी आदित्यनाथ का कर्म क्षेत्र मानी जाती है. हालांकि, योगी के इस्तीफे के बाद इस सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा था.

बता दें कि गोरखपुर सीट पर प्रत्याशी को लेकर कुछ नेताओं का मानना था कि गोरखपुर जैसी महत्वपूर्ण सीट पर कांग्रेस को अपना (संगठन से जुड़ा) प्रत्याशी उतारना चाहिए. इस सूची में संगठन से जुड़े सिद्धार्थ प्रिय श्रीवास्तव का नाम प्रत्याशियों में सबसे ऊपर था. हाल में ही कांग्रेस में शामिल हुईं चेतना पाण्डेय, अधिवक्ता मधुसूदन त्रिपाठी, पवन सिंह और राजेश त्रिपाठी के नाम भी प्रत्याशियों की सूची में शामिल थे.
गोरखपुर सीट की अगर बात करें तो बीजेपी ने फिल्‍म अभिनेता रविकिशन पर दांव खेला हैं. वहीं गठबंधन से सपा प्रत्‍याशी रामभुआल निषाद चुनाव मैदान में है. इसी कड़ी में मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ की हियुवा के बागी और हियुवा भारत के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष सुनील सिंह ने प्रवीण तोगड़िया की पार्टी के सिंबल पर गोरखपुर सदर सीट से चुनाव लड़ रहे हैं.

निषाद वोटरों की अहम भूमिका

गोरखपुर के जातीय गणित को यदि देखा जाए तो यहां 19.5 लाख वोटरों में से 3.5 लाख वोटर निषाद समुदाय के हैं. इस संसदीय क्षेत्र में निषाद जाति के सबसे अधिक मतदाता हैं. वहीं यादव और दलित मतदाता दो-दो लाख हैं. ब्राह्मण वोटर करीब डेढ़ लाख हैं. यदि चुनाव में निषाद, यादव, मुसलमान और दलित एकजुट हो जाते हैं तो चुनाव परिणाम चौंका भी सकते हैं.