भाजपा के लिए उसके घर के बागी ही प्रत्याशियों की जीत में रोड़े अटकाने की कोशिश कर रहे हैं। इनमें वह सांसद हैं, जो पिछले 2014 के चुनाव में जीते थे, लेकिन इस बार उनकी जगह नए प्रत्याशी को चुनाव मैदान में उतार दिया गया। ऐसे अब तक 19 सांसदों के टिकट काटे गए हैं। पिछली बार जीते इन सांसदों में कुछ टिकट कटने के बाद चुप्पी साधकर घर बैठ गए, या कुछ सांसद अधिकृत प्रत्याशी का खुलकर विरोध कर रहे हैं। कुछ विपक्षी दलों के खेमे में चले गए या प्रत्याशी बन गए। खुलकर विरोध करने वाले तो सामने हैं, लेकिन जो चुप बैठे हैं। उनकी चुप्पी  क्या  गुल खिलाएगी, यह तो 23 मई को  ही सामने आएगा।  

अंशुल वर्मा
हरदोई (सु.) से सांसद अंशुल वर्मा की जगह जय प्रकाश रावत को टिकट दिया गया। इसके विरोध में अंशुल ने भारतीय जनता पार्टी से त्यागपत्र दे दिया और समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए। चर्चा है कि अब वह भाजपा के खिलाफ अपने समर्थक वोटों को तोड़ने में जुटे हैं।

  भरत सिंह
बलिया से सांसद भरत सिंह की जगह भदोही के सांसद वीरेन्द्र सिंह मस्त को प्रत्याशी बनाया गया है। इसके विरोध में भरत सिंह ने भाजपा नेतृत्व को लम्बा पत्र भेज कर अपने टिकट कटने की वजह ही नहीं पूछी, बल्कि वीरेन्द्र सिंह मस्त को बाहरी प्रत्याशी बताकर उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।  

चौधरी बाबूलाल
फतेहपुर-सीकरी के सांसद चौधरी बाबूलाल की जगह वहां से राजकुमार चाहर को प्रत्याशी बनाया गया। पार्टी के इस फैसले के विरोध में बाबूलाल उठ खड़े हुए। उन्होंने प्रत्याशी के विरोध में अपने समर्थकों के साथ कई बैठकें कीं। इसका असर भी फतेहपुर में देखने को मिला।

  रामचरित्र निषाद
मछलीशहर (सु.) से सांसद रामचरित्र निषाद ने भी अपनी जगह बहुजन समाज पार्टी से आए बी.पी.सरोज को प्रत्याशी बनाने पर नाराजगी जाहिर की। उनकी    नाराज़गी का नतीजा यह रहा कि अब वह समाजवादी पार्टी में आ गए हैं और खुलकर नये प्रत्याशी का  विरोध कर रहे हैं।

 अशोक दोहरे
इटावा (सु.) से सांसद अशोक दोहरे की जगह आगरा के सांसद डा. रामशंकर कठेरिया को प्रत्याशी  बनाया गया तो अशोक दोहरे कांग्रेस में चले गए। कांग्रेस ने अशोक दोहरे को अपना प्रत्याशी बना  दिया। कांग्रेस के प्रत्याशी बनकर भाजपा प्रत्याशी के लिए मुसीबत बने हैं। 

प्रियंका रावत 
बाराबंकी (सु.) संसदीय क्षेत्र की सांसद प्रियंका रावत को दोबारा चुनाव मैदान में न उतार कर उनकी जगह उपेन्द्र रावत को प्रत्याशी बनाया गया है। 18 मई को उपेन्द्र रावत भाजपा के वरिष्ठ नेता विनय कटियार और काबीना मंत्री ब्रजेश पाठक की मौजूदगी में नामांकन करने जा रहे थे, उनके साथ प्रियंका रावत नहीं थीं। हालांकि, बीते दिनों प्रियंका रावत अपना टिकट कटने की वजह प्रदेश नेतृत्व से पूछने आईं थीं, लेकिन संतोषजनक उत्तर न मिलने पर वह वापस घर चुपचाप आकर बैठ गईं।

भैरो प्रसाद मिश्र

बांदा के सांसद भैरो प्रसाद मिश्र की जगह इसी क्षेत्र के विधायक आर.के.पटेल को प्रत्याशी बनाया गया। इसके विरोध में श्री मिश्र व उनके समर्थकों ने भाजपा के  प्रदेश मुख्यालय परराष्ट्रीय अध्यक्ष अमित  शाह के सामने जमकर प्रदर्शन किया था। इसके बाजवूद भी जब उनकी  नहीं सुनी गई तो वह विरोध पर उतर आए। उनके विरोध के चलते आरके पटेल को खासी मशक्कत करनी पड़ रही है।