अहमदाबाद: गुजरात में लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को झटका देते हुए ओबीसी नेता अल्पेश ठाकोर ने बुधवार को पार्टी छोड़ दी. वर्ष 2017 में कांग्रेस में शामिल होने के बाद ठाकोर को पार्टी का राष्ट्रीय सचिव नियुक्त किया गया था. उन्होंने गुजरात के कांग्रेस प्रमुख अमित चावड़ा को लिखे पत्र में कहा कि वह अपमान और धोखे की वजह से पार्टी में सभी पदों से इस्तीफा दे रहे हैं. ठाकोर ने कहा, "मैं ऐसी पार्टी में नहीं रह सकता, जहां मेरा अपमान किया जा रहा है, अनदेखी की जा रही है और धोखा दिया जा रहा है." 

उन्होंने पत्र में लिखा, "मेरे समुदाय के गरीब युवा नाराज और खफा हैं क्योंकि उनकी अनदेखी की जा रही है और अपमान किया जा रहा है. मेरे लिए ठाकोर सेना सर्वोच्च है...मेरी सेना ने मुझसे कहा कि यदि वहां हमारी अनदेखी हो रही है, अपमान किया जा रहा है और धोखा दिया जा रहा है तो मैं पार्टी छोड़ दूं."  

वहीं, अमित चावड़ा ने कहा कि वह मीडिया में कुछ भी कहने से पहले ठाकोर से बात करेंगे. ठाकोर ने बाद में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि वह भाजपा में शामिल नहीं हो रहे हैं. उन्होंने कहा, "2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान ठाकोर सेना ने लगभग 43 सीट जिताने में कांग्रेस की मदद की लेकिन चुनाव खत्म हो जाने पर हमारे युवाओं को दरकिनार किया गया, यहां तक कि अपमानित किया गया. मैंने पार्टी नेताओं से अपने संगठन में हमारे युवाओं को उपयुक्त पद देने के लिए बार-बार कहा."  

संवाददाता सम्मेलन में ठाकोर के साथ उनके समुदाय के दो विधायक धवल सिंह जाला और भरत ठाकोर भी थे. अल्पेश ठाकोर ने कहा, "मैं बीजेपी में शामिल नहीं हो रहा हूं. मैं विधायक के रूप में इस्तीफा नहीं दे रहा हूं. मैं किसी भी लोकसभा उम्मीदवार (कांग्रेस या बीजेपी का) के लिए चुनाव प्रचार करने नहीं जा रहा हूं। मैं ठाकोर सेना के उम्मीदवारों के लिए प्रचार करूंगा जो बनासकांठा लोकसभा सीट और ऊंझा विधानसभा सीट (उपचुनाव) से लड़ रहे हैं."  

ओबीसी नेता ने दावा किया कि गुजरात में कुछ कांग्रेस नेता चुनाव टिकट 'बेच रहे हैं.' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि गुजरात के कांग्रेस प्रभारी राजीव सातव ने "हमारे युवाओं को उचित पद दिए जाने के मेरे बार-बार के आग्रह के बावजूद कुछ नहीं किया." इससे पहले बुधवार को गुजरात क्षत्रिय ठाकोर सेना ने ठाकोर को अल्टीमेटम दिया था कि वह 24 घंटे के भीतर कांग्रेस छोड़ दें. ठाकोर कांग्रेस से नाराज थे क्योंकि उसने उन्हें पाटन लोकसभा सीट से टिकट नहीं दिया और न ही उनके सहयोगियों को टिकट देने पर विचार किया. गुजरात में ओबीसी नेता के रूप में उभरने के बाद ठाकोर 2017 के गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में शामिल हो गए थे और पाटन जिले की राधनपुर विधानसभा सीट से जीत दर्ज करने में सफल रहे थे.