पढ़िए अशोक अर्गल का चुनावी गणित

ब्यूरो रिपोर्ट, ग्वालियर

मुरैना के मेयर औऱ पांच बार के बीजेपी सांसद रहे अशोक अर्गल का भाजपा छोड़ना तय हो गया है पूर्व मंत्री रामनिवास रावत की मध्यस्थता से उनकी कांग्रेस में एंट्री तय है आजकल में उनका टिकट भी फाइनल हो जाएगा।बीजेपी के बड़े नेताओं के राडार से अर्गल बाहर हो चुके है अब फैसला इस बात पर होना है कि अर्गल मुरैना से लड़ेंगे या आरक्षित भिंड से। रामनिवास रावत चाहते है कि अर्गल मुरैना से लड़े क्योंकि वे नही चाहते है कि कोई कांग्रेसी उनके अलावा लोकसभा  लड़े  मुरैना के सभी विधायकों ने उनके नाम का विरोध किया है इसलिये वे चाहते है कि नए नेता के रूप में अर्गल को आगे किया जाए।रामनिवास ने श्योपुर के विधायक बाबू जंडेल( जो उन्ही की बिरादरी के है) को भी इस मुहिम में अपने साथ ले लिया है।अर्गल 4 बार मुरैना से सांसद रहे है इस दौरान उनके व्यापक सम्पर्क इस संसदीय क्षेत्र में रहे है सीट पर 3 लाख से ज्यादा जाटव वोटर है और बसपा से ठाकुर जाती के रामलखन कुशवाह मैदान में इसलिये मुरैना में जाटव जाती के अर्गल कांग्रेस के लिये चुनावी राजनीति के लिहाज से मुफीद हो सकते है क्योंकि  मुरैना में जाटव जाती ठाकुरों को वोट करने से परहेज करती है। इसके अलावा गुर्जर,मीणा,दोनों जातियां कांग्रेस मानसिकता की है इस सीट पर।
रामनिवास रावत के लिये अर्गल इसलिए भी फायदे का सौदा है क्योंकि अर्गल लो प्रोफाइल नेता है औऱ वे रामनिवास की छाया में रहेंगे।साँसद सिंधिया भी अर्गल को तोड़कर बीजेपी पर मनोवैज्ञानिक दबाब बनाना चाहेंगे।
 मुरैना की राजनीति में अगर जातियों के मिजाज की बात करें तो गुर्जर ,ब्राह्मण,जाटव,ये तीन बड़ी जातियां इस समय बीजेपी के खिलाफ है विधानसभा चुनाव में इनकी नाराजगी का असर बीजेपी भुगत चुकी है।कांग्रेस का मानना है कि बसपा से ठाकुर जाती के रामलखन कुशवाह उम्मीदवार हो जाने से जहां ठाकुर मतो का विभाजन होगा वहीं जाटव जाती स्थानीय सामाजिक समीकरण के चलते बसपा के ठाकुर उम्मीदवार को वोट नही करेगी, इसके अलावा मुरैना,सुमावली विधानसभा के गुर्जर भी बीजेपी के विरुद्ध है, दो विधानसभा चुनाव से किसीब्राह्मण को बीजेपी से टिकट नही मिलने से ब्राह्मण नाराज है और अब अनूप मिश्रा का टिकट कटने से इस बिरादरी में नाराजगी के स्वर औऱ मुखर हुए है।इन सभी जातीय समीकरणों को ध्यान में रख कांग्रेस अशोक अर्गल को सामान्य सीट से भी टिकट देने का जोखिम उठा सकती है।अंतिम निर्णय सिंधिया को करना है अर्गल दोनो जगह से लड़ने तैयार है।

न्यूज़ सोर्स : ख़बरमंत्री ब्यूरो, ग्वालियर