नई दिल्ली । भगोड़े विजय माल्या की जब्त की गई संपत्ति में से शेयरों की पहली बिक्री में 1008 करोड़ रुपए हासिल हुए हैं। एक पीएमएलए कोर्ट ने यूनाइटेड ब्रुअरीज होल्डिंग्स लिमिटेड (यूबीएचएल) की यह मांग खारिज कर दी थी कि उसकी सब्सिडियरी रही यूनाइटेड ब्रुअरीज लिमिटेड (यूबीएल) के शेयरों की बिक्री पर रोक लगाई जाए। मार्च 2016 में माल्या के देश छोड़कर भाग जाने के बाद से उसकी जब्त की गई संपत्ति की यह पहली बिक्री है। ये शेयर पहले यूबीएचएल के पास थे, जो माल्या की सभी कंपनियों की होल्डिंग कंपनी थी। यूबीएचएल पर अभी दुनिया की सबसे बड़ी शराब कंपनी डायाजियो का कंट्रोल है। 
माल्या की दिवालिया हो चुकी कंपनी किंगफिशर एयरलाइंस के मामले की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (एन्फोर्समेंट डायरेक्टरेट यानी ईडी) ने पाया था कि यूबीएल के शेयरों के रूप में काफी ऐसेट्स यस बैंक के पास हैं। ईडी के अनुसार, उसने जांच में पाया कि किंगफिशर एयरलाइंस ने लोन का काफी हिस्सा चुका दिया था और मामूली रकम ही बकाया है। लिहाजा गिरवी रखे शेयरों पर कर्ज से जुड़ी कोई दावेदारी नहीं बन रही थी और वे यूं ही यस बैंक के पास पड़े थे। ईडी ने बुधवार को एक बयान में कहा लिहाजा विजय माल्या-यूबीएच से इन शेयरों को अलग करने और विजय माल्या को लौटने पर मजबूर करने के लिए ईडी ने इन शेयरों को फ्रीज करने का अनुरोध करते हुए पीएमएलए स्पेशल कोर्ट में आवेदन दिया था। 
ईडी के ही आवेदन पर नवंबर 2016 में माल्या को भगोड़ा घोषित किया गया था। बाद में ईडी के अनुरोध पर पीएमएलए कोर्ट ने कुछ गिरवी और बिना गिरवी वाले शेयर जब्त करने का आदेश दिया था। इनमें यूबीएल के 74,04,932 शेयर भी थे, जो यूबीएचएल के पास थे। किंगफिशर एयरलाइंस को दिए गए लोन पर जमानत के रूप में ये शेयर यस बैंक के पास पड़े थे। बाद में एसबीआई की अगुवाई वाले बैंकों के समूह की ओर से कदम उठाते हुए डीआरटी, बेंगलुरु के रिकवरी ऑफिसर ने यस बैंक को एक नोटिस पिछले साल जुलाई में दिया। नोटिस में यस बैंक को निर्देश दिया गया था कि वह यूबीएल के ये 74,04,932 शेयर रिकवरी ऑफिसर, डेट रिकवरी ट्रिब्यूनल, बेंगलुरु के पास ट्रांसफर करे, जिसका फाइनल ऑर्डर डीआरटी ने दिया था। 
ईडी ने कहा चूंकि ये शेयर पहले ही पीएमएलए स्पेशल कोर्ट के निर्देश पर वह नवंबर 2016 में पहले ही फ्रीज कर चुका था, लिहाजा यस बैंक रिकवरी ऑफिसर के निर्देश पर कदम नहीं उठा सका। यस बैंक से शेयर ट्रांसफर नहीं होने पर डीआरटी ने 13 अगस्त, 2018 को यस बैंक की ऐसेट्स अटैच करने का आदेश दिया था। इसके खिलाफ यस बैंक ने कर्नाटक हाई कोर्ट में अपील की थी, जिसने 27 फरवरी को यस बैंक को निर्देश दिया कि वह यूबीएचएल के शेयर तीन हफ्तों में रिकवरी ऑफिसर के फेवर में सरेंडर कर दे।