रायपुर । लोकसभा चुनाव की घोषणा के बाद कांग्रेस प्रदेश की 11 सीटों में से पांच पर उम्मीदवार घोषित कर भले ही बढ़त बनाने में कामयाब रही है, लेकिन बूथ मैनेजमेंट में पिछड़ती नजर आ रही है। वहीं भाजपा बूथ स्तर पर तैयारी में तो आगे निकल गई है, मगर उम्मीदवार की घोषणा न होने से दुविधा में है।

बस्तर में बूथ पर कांग्रेस आगे, भाजपा पिछड़ी

बस्तर लोकसभा क्षेत्र में कांग्रेस की 1100 बूथ कमेटियां सक्रिय हैं, लेकिन 700 बूथ कमेटियां निष्क्रिय हैं। कांग्रेस बूथ स्तर पर बैठक कर रही है, जबकि भाजपा की सिर्फ जिला मुख्यालय में ही बैठकें कर रही हैं। बूथ स्तर तक भाजपा नहीं पहुंची है।

 

दुर्ग में भाजपा का बूथ प्रबंधन बेहतर 

दुर्ग लोकसभा क्षेत्र में 2172 मतदान केंद्र के हिसाब से कांग्रेस व भाजपा ने बूथ कमेटियां बनाई है। कांग्रेस ने संकल्प शिविर से बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद किया। वहीं भाजपा ने मंडल स्तर पर गठित शक्ति केंद्रों की बैठक ली। बूथ प्रबंधन कांग्रेस की अपेक्षा भाजपा का बेहतर है।

 

रायपुर में भाजपा-कांग्रेस ने कसी कमर

रायपुर में भाजपा एक बूथ 20 यूथ को जोड़ने का काम कर रही है। भाजपा सिर्फ जिला मुख्यालय में बैठकें कर रही हैं। वहीं, कांग्रेस बूथ स्तर पर बैठक कर रही है। कांग्रेस ने प्रत्येक वार्डों में अनुभाग प्रभारी बनाया है। इसी तरह भाजपा ने पन्नाा प्रभारी नियुक्त किए हैं।

 

कांकेर में कांग्रेस से आगे निकली भाजपा 

कांकेर में कांग्रेस 1600 बूथ कमेटियों के सक्रिय होने का दावा तो कर रही है, लेकिन 400 बूथ कमेटियां भी सक्रिय नहीं हो पाई हैं। भाजपा का भी यही हाल है। हालांकि बूथ प्रबंधन में यहां भाजपा कांग्रेस से आगे नजर आ रही है।

 

राजनांदगांव में बूथ प्रबंधन में भाजपा ने मारी बाजी

राजनांदगांव में कांग्रेस और भाजपा दोनों ने सभी 2320 बूथों पर कमेटियां बना चुकी है। बूथ प्रबंधन में भाजपा फिलहाल आगे है। कांग्रेस में केवल बैठकों का दौर चल रहा है।

 

महासमुंद में हम किसी से कम नहीं के हालात

महासमुंद में कांग्रेस ने जहां हर बूथ में एक कमेटी के मुताबिक 2140 बूथ कमेटियां गठित की है। वहीं भाजपा 2260 बूथ कमेटी बनाई हैं। बूथ प्रबंधन में दोनों ही दल में हम किसी से कम नहीं के हालात हैं। पन्न्ा प्रभारी भाजपा का सबसे निचली इकाई है।

 

बिलासपुर में नहीं सुनाई दे रही तैयारी की आहट 

बिलासपुर क्षेत्र में किसी राजनीतिक दल के कार्यकर्ताओं की आहट में नहीं सुनाई दे रही है। हालांकि भाजपा में जहां थोड़ी बहुत सक्रियता दिखाई दे रही है, वहीं कांग्रेस में दिग्गज नेताओं के टिकट की दौड़ में शामिल होने के कारण गतिविधि ठप पड़ी हुई है। भाजपा ने बूथ कमेटियों को ही सक्रिय करने की योजना बनाई है। वहीं पन्न्ा प्रभारियों को अभी कोई जिम्मेदारी नहीं सौंपी नहीं गई।

 

कोरबा में भाजपा-कांग्रेस दोनों सुस्त

कोरबा क्षेत्र में कांग्रेस ने 1068 बूथ कमेटियां बनाई हैं। मगर इनमें से 300 कमेटियां अभी सक्रिय नहीं है। भाजपा बूथ प्रबंधन के मामले में अभी कोरबा व कटघोरा में बैठक ली है। पन्नाा प्रभारी को बूथ के प्रत्येक मतदाताओं से मुलाकात करने की जिम्मेदारी गई है, पर प्रभारी घर से नहीं निकले हैं।

 

सरगुजा में कांग्रेस एवं भाजपा दोनों तैयार 

सरगुजा में कांग्रेस एवं भाजपा दोनों ने पूर्व में ही तैयारी शुरू कर दी थी। भाजपा ने सरगुजा के बूथ कमेटियों का प्रशिक्षण आयोजित किया था। वहीं कांग्रेस के सभी बूथों में पांच-पांच कमेटियां सक्रिय हैं। वहीं भाजपा के बूथ कमेटियों में भी निराशा की स्थिति है।

रायगढ़ में भाजपा कांग्रेस के मुकाबले अधिक मजबूत 

रायगढ़ में कांग्रेस की कुल 2324 बूथ कमेटियां हैं। कांग्रेस कार्यकर्ता प्रदेश में सरकार होने के कारण जोश में हैं, पर संगठनात्मक और जमीनी स्तर पर वह सक्रियता नहीं है। संगठन भाजपा के मुकाबले बिखरा हुआ है। वहीं भाजपा का बूथ स्तर पर संपर्क अभियान चल रहा है। बूथ स्तर पर भाजपा कांग्रेस के मुकाबले अधिक मजबूत नजर आ रही है।

जांजगीर-चांपा में अभी शुरू नहीं तैयारी 

जांजगीर-चांपा में कांग्रेस और भाजपा दोनों ने 1407 बूथ कमेटियां बना रखी है। बूथ स्तर पर प्रबंध्ान में भाजपा आगे है। बूथ कमेटी व पन्ना प्रभारी बनाकर उन्हें जिम्मेदारी दे गई है। कांग्रेस की कमेटियां सक्रिय नजर नहीं आ रही है।

कहीं सोशल मीडिया तो कहीं जनसंपर्क पर जोर

स्तर में कांग्रेस और भाजपा संदेशों को बूथ स्तर पर पहुंचाने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं रायपुर में दोनों दल फेसबुक, वाट्सएप और जनसंपर्क से बूथ स्तर पर पार्टी द्वारा किए गए कामों को आम जनता तक संदेश पहुंचा रही हैं। कांकेर में पोस्टर, बैनर और पंफलेट का सहारा लिया जा रहा है। राजनांदगांव में दोनों दलों में अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखी।