पांच फीसदी आरक्षण की मांग को लेकर प्रदेश में नौ दिन तक चले गुर्जर आरक्षण आंदोलन से अकेले कोटा रेल मंडल को ही करीब 20 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है. अन्य रेल मंडलों के राजस्व का नुकसान अलग है. वहीं कई जगह राष्ट्रीय राजमार्ग और दूसरे मार्ग बाधित होने से राजस्थान रोडवेज तथा अन्य ट्रांसपोटर्स को भी खासा नुकसान हुआ है. शनिवार को आंदोलन खत्म होने के बाद सभी ने राहत की सांस ली है.
कोटा रेल मंडल के सीनियर डीसीएम विजय कुमार बताते है कि गुर्जर आरक्षण आंदोलन के चलते गत 9 दिनों में मंडल की 494 ट्रेनें प्रभावित हुईं. इनमें से 243 ट्रेनों को रेलवे की संपत्ति और रेल यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पूर्णतया रद्द किया गया था. 72 ट्रेनों को आंशिक रूप से रद्द किया गया था. वहीं 179 ट्रेनों को परिवर्तित रेल मार्गों से चलाया गया था.
गत 8 फरवरी की शाम 4 बजे से शुरू हुआ गुर्जर आरक्षण आंदोलन 9वें दिन 16 फरवरी को दोपहर बाद खत्म हुआ. आंदोलन के लिए गुर्जर समाज ने दिल्ली-मुबंई रेलवे ट्रैक पर सवाई माधोपुर जिले के मलारना डूंगर में महापड़ाव डाला था. इससे यह रेलवे ट्रैक पूरी तरह से बाधित हो गया था. अभी तक जितनी बार भी गुर्जर आरक्षण आंदोलन हुआ है हर बार कोटा रेल मंडल आंदोलनकारियों के निशाने पर रहा है.