जयपुर. जयपुर. गुर्जर समेत पांच जातियों को 5% आरक्षण देने संबंधी विधेयक से गुर्जर नेता किरोड़ी बैंसला संतुष्ट नहीं हैं। इसके चलते राज्य में लगातार आठवें दिन भी आंदोलन जारी है। आंदोलन खत्म करने को लेकर कैबिनेट मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने बैंसला से फोन पर बात की। बताया जा रहा है कि विश्वेंद्र सिंह ने सवाईमाधोपुर जिले के मलारना में बात करने की बात रही। वहीं, बैंसला धरनास्थल पर ही बातचीत पर अड़े हैं।

 

इस बीच, आईएएस नीरज के पवन शुक्रवार को फिर बैंसला से बातचीत करने पहुंचे। उन्होंने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से बैंसला की फोन पर बात भी करवाई। गुरुवार को भी वह बिल की कॉपी लेकर बैंसला से मिलने के लिए पहुंचे थे। 

 

सरकार का सब्र टूटने वाला: मंत्री

उधर, मंत्री विश्वेंद्र सिंह का कहना है कि बैंसला की सारी उचित मांगें मान ली गई हैं। अगर किसी की निजी महत्वकांक्षा है तो हम कुछ नहीं कर सकते। सरकार का सब्र अब टूटने वाला है। सरकार मोम की नहीं। हम अपना काम करेंगे।

 

सरकार लिखित में दे बिल कोर्ट में अटका तो उनकी जिम्मेदारी होगी: बैंसला

इससे पहले गुरुवार को बिल का अध्ययन करने के बाद बैंसला ने कहा कि समाज इस बिल से संतुष्ट नहीं। पहले की तरह ही ये बिल भी कोर्ट में अटक सकता है। सरकार को लिखित में देना होगा की अगर ये कोर्ट में अटका तो उनकी जिम्मेदारी होगी। गुर्जर नेता शैलेन्द्र सिंह ने भी कहा कि ये बिल 100 प्रतिशत कोर्ट में अटकेगा। सरकार ये आश्वासन दे कि अगर ऐसी स्थिति होती है तो वो कैसे निपटेगी। गुर्जरों का आंदोलन जारी रहेगा। 

 

इन पांच जातियों को दिया गया आरक्षण

बुधवार को बिल विधानसभा में पास हो गया था। इसमें सरकारी नौकरियों के साथ ही शैक्षणिक संस्थाओं में अलग से आरक्षण देने का प्रावधान किया गया  है। विधानसभा में कैबिनेट मंत्री बीडी कल्ला ने विधेयक पेश किया। इसमें बंजारा, गाडिया लौहार, गुर्जर, रेबारी, गड़रिया जातियों को आरक्षण देने का जिक्र है।
 

आंदोलन के चलते कई जगहों पर यातायात बाधित

शुक्रवार को भी गुर्जर आंदोलन के चलते कोटपूतली से नीमकाथाना, हिंडौन से करौली, सवाईमाधोपुर से धौलपुर और दौसा से आगरा का मार्ग पूरी तरह से बंद है। इन मार्गों पर बसों के साथ अन्य वाहनों का संचालन बंद है। दौसा-आगरा की वजह से रोडवेज को सबसे अधिक राजस्व का नुकसान हुआ है। इस मार्ग के बंद होने से यूपी के 50 प्रतिशत शहरों का संपर्क टूट गया है।