रायपुर। छोटी लाइन की छुकछुक ट्रेन की रफ्तार बढ़ने वाली है। पर्यटन विभाग रेल मंत्रालय से राजिम और धमतरी तक छोटी लाइन में चलने वाली रेलगाड़ी के साथ अनुबंध करने जा रहा है। ये वही छोटी लाइन में चलने वाली छुकछुक गाड़ी है, जिससे कभी बापू गुजरे थे। तारीख- 21 दिसंबर 1920, स्थान रायपुर से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने इसी धमतरी जाने वाली रेलगाड़ी से सफर किया था। मौका था धमतरी में कंडेल नहर सत्याग्रह के नेतृत्व करने का। उस जमाने में सफर के लिए ट्रेन ही सुविधाजनक मानी जाती थी।

यह ऐतिहासिक पल इतिहास के पन्नों में आज भी दर्ज है, लेकिन घाटे में चल रही इस छोटी लाइन की रेलगाड़ी को अब पर्यटन दौड़ाने के फिराक में है। प्रदेश की इस इकलौती छुकछुक गाड़ी को धरोहर के रूप में संजोने के लिए पर्यटन विभाग ने कवायद शुरू कर दी है। यह रेलगाड़ी तेलीबांधा से धमतरी और राजिम के लिए चलती रही।
वहीं प्रदेश में विदेशी पर्यटकों की संख्या में भी इजाफा होता जा रहा है। रशिया से लेकर दक्षिण कोरिया तक के पर्यटक प्रदेश में शामिल हो रहे हैं। ये सब बातें इसलिए हो रही है क्योंकि 25 नवंबर राष्ट्रीय पर्यटन दिवस मनाया जाता है। इस मौके पर हम आपको पर्यटन विभाग की ये अनोखी पहल और रायपुर में गुरुवार को पहुंचे विदेशी पर्यटकों से बातचीत बताएंगे।
1900 में पटरियों पर दौड़ी थी ये गाड़ी

17 अप्रैल 1896 को रायपुर-अभनपुर-राजिम के लिए ट्राम-वे की अनुमति मिली। वर्ष 1900 में सितंबर से दिसंबर के मध्य 45.74 मील लंबी और 10.54 मीटर चौड़ी राजिम रेल लाइन को यातायात के लिए खोला गया था। इस तरह सौ साल से भी पुरानी है यह छोटी रेल लाइन बनाई गई और रेलगाड़ी दौड़ पड़ी।