रायपुर। 'बात सिर्फ पैसों की या आराम की नहीं थी। उन्होंने हमसे चीटिंग की थी। रातभर का सफर, बस में मैं और मेरी मामी थी। तीन-चार अन्य पैसेंजर भी थे, बहुत ही डराने वाला सफर था वह। पूरे रास्ते सहमे हुए थे हम। पांच घंटे लेट होने के कारण दूसरी बुकिंग भी चली गई। तीन दिन की बजाय दो दिन ही गुजरात के 'रण उत्सव में शामिल हो पाये। हालांकि मानसिक परेशानी की कोई भरपाई नहीं हुई, फिर भी ट्रेवल्स और गुजरात पुलिस को एक सबक जरूर मिला।'

यह कहना है छत्तीसगढ़ की महिला अफसर और राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान की सहायक संचालक डॉ. स्मृति शर्मा का। जिनकी जिद के सामने गुजरात प्रशासन को भी झुकना पड़ा। गुजरात जाने के दौरान बस ट्रेवल्स ने उनके साथ धोखाधड़ी की।

परेशानी से वह यहां आयोजित रण उत्सव में देर से पहुंच पाईं। इसकी शिकायत पीएमओ से की तो गुजरात की पुलिस ने पहले टालमटोल किया लेकिन बाद में गुजरात के प्रशासन का गुरुर टूट गया और उन्हें महिला अफसर को गुजराती में माफीनामा भेजना पड़ा।

महिला सशक्तिकरण का यह नायाब उदाहरण की कहानी सुनकर आप भी कहेंगे कि जागस्र्कता और महिला सशक्तिकरण की यह मूर्ति बनकर लाखों महिलाओं को जुल्म और अन्याय के खिलाफ लड़ने की मिसाल दे रही हैं।

सहायक संचालक डॉ. स्मृति शर्मा सितम्बर 2017 में गुजरात में आयोजित 'रण उत्सव में शामिल होने पहुंची थीं। उनके साथ उनकी मामी भी थीं। दोनों ने अहमदाबाद से गुजरात के भुज के लिए वोल्वो से महंगी बुकिंग कराई थी। ये यहां से जब निकले तो पता चला कि वोल्वो बस लेट हो गई है।

रात 12बज गए, तब तक बैठे रहे। बाद में वोल्वो की जगह बस संचालक ने पैसेंजर और नॉन लग्जरी बस थमा दी। वह भी सन्नाटेभरी। बस में सिर्फ 3 से 4 लोग थे। सफर बहुत डरावना था। सीधी सी बात थी स्मृति शर्मा के साथ धोखा हुआ था। उन्होंने ठान लिया मनमानी नहीं सहेंगी और रायपुर लौटते ही प्राइम मिनिस्टर ऑफिसर पब्लिक गिवेंस में अपनी शिकायत दर्ज करा दी और न्याय की मांग की।

महिला सशक्तिकरण का इससे बेहतर उदाहरण क्या हो सकता है कि स्मृति शर्मा को पीएमओ वेबसाइट में शिकायत करने का सिस्टम मालूम था। उनकी शिकायत गुजरात सरकार तक पहुंची। गुजरात शासन ने पुलिस विभाग के अफसरों को कार्रवाई के लिए कहा तो सभी के हाथ-पांव फूल गए।

डॉ. स्मृति शर्मा से सीधा संपर्क करके गुजरात पुलिस के इंस्पेक्टर अश्वनि गर्चर का फोन आया। उन्होंने कहा कि आपके साथ जो हमारे राज्य में हुआ उसके लिए माफी चाहता हूं। हमारी तरफ से आपको पैसे रिफंड कराया जाएगा और माफीनामा भेजा जाएगा।

 

यह बात पुलिस ऑफिसर ने सितम्बर 2017 में कही थी लेकिन जवाब मई 2018 तक नहीं आया। इधर पीएमओ वेबसाइट पर बता दिया गया कि समस्या का समाधान कर दिया गया है। स्मृति शर्मा ने जब जानकारी ली तो पीएमओ से जवाब आया कि आपकी शिकायत का निराकरण कर दिया गया है।

उन्होंने जिद ठान ली कि इसके खिलाफ लड़ूंगी। अक्टूबर 2018 में स्मृति ने फिर पीएमओ की वेबसाइट पर शिकायत करके जानकारी दी कि उनकी समस्या हल नहीं नहीं हुई है और गलत जानकारी दी जा रही है।

 

अंतत: हार गया प्रशासन 

 

 

पीएमओ में दूसरी बार शिकायत होने के बाद हड़कंप मच गया। आनन- फानन में पुलिस ने दिसम्बर 2018 में स्मृति शर्मा के खाते में उनके बस ट्रेवल्स की बुकिंग का 1500 रुपए वापस कराया। इसके बाद उन्हें गुजरात की पुलिस ने गुजराती भाषा में माफीनामा भी भेजा। डॉ. स्मृति शर्मा कहती हैं कि मेरी नजर में आत्मसम्मान की रक्षा सही को सही और गलत को गलत करना ही है। यही तो महिला सशक्तिकरण है।